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Krishna Janmashtami in Hindi Essay | श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध व्रत विधि

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Krishna Janmashtami in Hindi Essay | श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध व व्रत विधि | Importance of Shri Krishna Janmashtami in Hindi | पढ़ें जन्माष्टमी पर्व पर हिन्दी निबंध | श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार, व्रत व पूजा विधि

Krishna Janmashtami in Hindi

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

कन्हैया, कान्हा, माखन चोर, लड्डू गोपाल … इन सब नामों से केवल माता यशोदा (Yashoda) ही नहीं बल्कि पूरा संसार इन्हें पुकारता है। हिन्दू धर्म के देवों में यूँ तो कोटि-कोटि देवी-देवताओं (Gods and Goddesses) की पूजा बड़े ही भक्ति भाव से की जाती है, लेकिन भगवान श्री कृष्ण (Lord Shri Krishna) ही केवल ऐसे हैं जिनकी भक्ति में प्रेम अधिक छलकता है। महिलाएं बाल गोपाल को गोपियों की ही तरह याद करती हैं या लड्डू गोपाल के रूप में उन पर ममता न्योछावर करती हैं।

श्री कृष्ण (Shri Krishna) के जन्म दिवस यानि की जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) को भी बड़े ही धूम धाम से हर घर में मनाया जाता है। “नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” जैसी गीत हर मंदिर से सुनाई देते हैं, जिनसे मन प्रसन्न हो उठता है। नटवर गिरधारी का जन्मदिन (Krishna Janmashtami) भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन सभी भक्त उपवास रखते हैं, प्यार, दुलार और श्रद्धा से अपने प्रभु श्री कृष्ण को याद करते हैं।

जगह जगह पर इनके नाम की झाँकियाँ सजाई जाती हैं। लड्डू गोपाल को झूला झुलाया जाता, माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है। फल, मेवा-मिठाई भी बड़ी भक्ति के साथ नंदलाल के चरणों में चढ़ाई जाती है और ठीक 12 बजते ही श्री कृष्ण (Shri Krishna) के जन्म पर शंख ध्वनि से वातावरण पावन हो जाता है।

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श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी …. हे नाथ नारायण वासुदेव 🙂

भगवान् कृष्ण का जन्म रात के गहरे अँधेरे में हुआ जब कंस के डर से वासुदेव उन्हें तेज़ बारिश में उठाकर अपने मित्र नन्द के यहाँ छोड़ आये, लेकिन वो इस बात से अनभिज्ञ (Unaware) थे कि उनका बालक तीनों लोकों का तारणहार और कंस का काल है।

Story of Janmashtami in Hindi

जन्माष्टमी की कथा

आइये अब जानते हैं जन्माष्टमी की सम्पूर्ण कथा-

कृष्ण के मामा कंस (Mama Kans) अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करते थे और उसने अपने मित्र वासुदेव के साथ उनका विवाह कराया। जब बड़े प्यार और दुलार से वो अपनी बहन देवकी को स्वयं उसके ससुराल छोड़ने जा रहा था तभी एक आकाशवाणी के माध्यम से उसे ज्ञात हुआ कि देवकी का आठवाँ पुत्र ही उसकी मृत्यु करेगा। ये भविष्यवाणी सुनते ही कंस ने रथ वापस अपने महल की ओर घुमाया और देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया।

देवकी की सात संतानों की कंस ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी और अब वो आठवें बालक की प्रतीक्षा में था। आठवें बालक के रूप में जब श्री कृष्ण (Shri Krishna) ने कंस का सर्वनाश करने हेतु माता देवकी की कोख से आधी रात को जन्म लिया तो सारी बेड़ियाँ और कारागार स्वत: ही खुल गए और सारे सैनिकों को गहरी निद्रा ने घेर लिए।

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नन्द के घर आनंद भयो, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की। … शुभ जन्माष्टमी 🙂

इसका लाभ उठाते हुए वासुदेव ने श्री कृष्ण (Shri Krishna) को उठाया और तेज़ बारिश और तूफ़ान का सामना करते हुए उन्हें अपने मित्र नन्द और उनकी पत्नी यशोदा के यहाँ छोड़ आये।

कुछ समय बाद जब कन्हैया जी माता यशोदा के लालन पालन में नटखट क्रीडाएं कर रहे थे, तभी कंस को पता चला कि देवकी का आठवाँ पुत्र जीवित है। कंस के कृष्ण की हत्या के हज़ारों प्रयत्न किये, मायावी राक्षसों का सहारा लिया, लेकिन भगवान कृष्ण ने अनोखी लीलाएं दिखायीं और कंस के सभी प्रयासों को विफल कर दिया।

बड़े होकर श्री कृष्ण ने कंस और उसके पापों का अंत किया और अपने माता-पिता देवकी और वसुदेव को मुक्त कराया।

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दही की हांड़ी, बारिश का फुहार, माखन चुराने आये नन्दलाल।

भगवान् श्री कृष्ण ने उस द्वापर युग में और भी कई लीलाएं दिखायीं जैसे कि पूतना राक्षसी का वध, लोगों की रक्षा में गोवर्धन पर्वत (Govardhan Mountain) को एक छोटी सी ऊँगली पर उठाना, अपने सभी मित्रों के लिए माखन की हांडी तोड़ना, नाग पर नृत्य करना, राधा रानी और गोपियों के साथ रास-लीला रचाना, सुदामा की दरिद्रता दूर करना, महाभारत में द्रौपदी की लाज बचाना, युद्ध में अर्जुन का सारथी बन उसे गीता उपदेश देना, अपनी परम भक्त मीरा के विष को अमृत बनाना। इसके अलावा और न जाने ही कितने चमत्कार और अपने भक्तों पर अनगिनत परोपकार किये भगवान श्री कृष्ण ने।

ये गाथा लगभग पाँच हज़ार वर्ष पुरानी है और तभी से कान्हा का जन्मदिवस (Birthday) यानि कि जन्माष्टमी (Janmashtami) बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर लाखों की संख्या में भीड़ भगवान् के दर्शन के लिए एकत्रित होती है, जहां वो सभी लड्डू गोपाल को झुला भी झुलाते हैं। कृष्ण मंदिर इस्कोन जो कि भारत में हज़ारों जगह है और विदेशों में कई जगह बहुत बड़े बड़े प्रचलित मंदिर हैं, इन सभी में भी कृष्ण की पूजा में करोड़ों लोग हिस्सा लेते हैं।

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छोटी छोटी गैयाँ छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल।

Shri Krishna Janmashtami Vrat and Pooja Vidhi

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत व पूजा विधि

आइये जानते हैं जन्माष्टमी पूजा की विधि-
✍ इस दिन सबसे पहले नहा- धोकर मंदिर साफ़ करें, भगवान के समक्ष ज्योति जलायें।
✍🏻 बाज़ार से लड्डू गोपाल के नए वस्त्र लाएं, झूला खरीदें।
✍ लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनायें, उनके झूले को सजायें और उनकी आरती करें।
✍🏻 उपवास रखने वाले लोग फलाहार या दही का सेवन कर सकते हैं, या फिर अन्य व्रत में खाने वाली चीज़ों से अपना पेट भरें।
✍ शाम को मंदिरों में कृष्ण भक्ति के गीत गाए जाते हैं और लोग छोटे बालकों को कृष्ण और राधा बनाकर उनकी झाकियां भी निकालते हैं।
✍🏻 जब सभी जगह कृष्ण भक्ति में लीन होतीं है उसी समय आधी रात को 12 बजे कृष्ण जन्म होता है।
✍ शंख के साथ भगवान् के जन्म की खुशियाँ मनाई जाती हैं।
✍🏻 उन्हें नहला कर नए वस्त्रों से सजाया जाता है । उन्हें माखन मिश्री और चरणामृत का भोग लगाया जाता है और उसी को प्रसाद बनाकर भक्तों में बाँट दिया जाता है।
✍ तत्पश्चात 12 बजे चंद्रमा को अर्ग देकर और कुछ पकवान बनाकर घर में भगवन को भोग लगाते हैं और उसके बाद पूरा परिवार पकवान के साथ अपना व्रत खोलता है।

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माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने सबको नचाया, ख़ुशी मनाओ उनके जन्मदिन की, जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया।

जन्माष्टमी के अवसर पर देश विदेश सभी जगह धूम होती है। कई जगह दही हांडी जैसे खेलों का भी आयोजन होता है। विद्यालयों में छोटे बच्चों को कृष्ण रूप में तैयार कर बुलाया जाता है। भगवान के लिए बड़े प्यार से उनका झूला, बिस्तर और नए कपड़े ख़रीदे जाते हैं। मंदिरों (Temples) की भीड़ में घंटों बाद दर्शन का नंबर आता है।

शिक्षा | Moral

लेकिन ये सिर्फ एक त्यौहार नहीं है यहाँ से भी हमें कुछ सीख लेनी चाहिए। अपने बच्चों को श्री कृष्ण का नाम ही नहीं बल्कि उनका आचरण भी सिखाएं कि श्री कृष्ण (Shri Krishna) की भांति वो भी अपनी माता का यशोदा की तरह आदर करे, अपनी माँ को ईश्वर का रूप माने।

अपने मित्रों की उसी प्रकार सहायता करनी चाहिए जिस प्रकार कृष्ण ने सुदामा (Sudama) की कठिन घड़ी में सहायता की। हमें अपने माता-पिता को भी हर संकट से बचाना चाहिए जैसे कृष्ण ने कंस से देवकी और वासुदेव (Devaki and Vasudev) को बचाया।

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कृष्ण जिनका नाम, गोकुल जिनका धाम, ऐसे श्री कृष्ण भगवान को हम सब का प्रणाम!!
आपको व आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई 🙂

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8 Comments

  1. आप बहुत अच्छे लेखक है और अच्छी अच्छी पोस्ट हमरे तक पहुंचाने के लिए धन्यवाद !!!

    August 13, 2017
    |Reply
    • HindIndia
      HindIndia

      🙂 🙂

      August 14, 2017
      |Reply
  2. awsome article, mai apka fan ban gaya hu.

    August 14, 2017
    |Reply
    • HindIndia
      HindIndia

      Thanks for using such a kind word Vishal ji. 🙂

      August 14, 2017
      |Reply
  3. सुंदर प्रस्तुति।

    August 14, 2017
    |Reply
    • HindIndia
      HindIndia

      Blog par aane wa apna vichar rakhne ke liye saadar aabhar Jyoti mam. 🙂

      August 14, 2017
      |Reply
    • HindIndia
      HindIndia

      Thank you!!

      August 16, 2017
      |Reply

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